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वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग व व्हाट्सएप कॉल से कानपुर में पहली सजा

वर्चुअल कोर्ट के रूप में शुरू हुई न्यायिक कार्यवाही के तहत कानपुर में पहली बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग व व्हाट्सएप कॉल से सजा सुनाई गई। जिला जज अशोक कुमार सिंह ने शादी के 11 महीने में ही विवाहिता की दहेज हत्या के लिए पति को उम्रकैद और ससुर को सात साल कैद की सजा सुनाई।


08/05/2020


दोनों पर पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। कोर्ट ने आदेश में पति को मृत्यु तक जेल में ही रखने का हुक्म सुनाया। आरोपी सास सुधा की मुकदमे के दौरान मौत हो चुकी है। महाराजपुर निवासी मुन्नीलाल ने बेटी ज्योति की शादी नर्वल निवासी अजीत के साथ 21 मई 2017 को की थी।

ससुरालीजन दहेज में मोटरसाइकिल और पचास हजार रुपये लाने के लिए ज्योति को मारते-पीटते और प्रताड़ित करते थे। 12 अप्रैल 2018 को ज्योति की हत्या कर शव को आत्महत्या का रूप देने के लिए फांसी से लटका दिया था।




जानकारी पर पहुंचे मुन्नीलाल ने अगले दिन नर्वल थाने में पति अजीत, ससुर पुत्तीलाल व सास सुधा समेत पांच लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विवेचना के बाद पति, सास, ससुर के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की गई।


 


सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने पति व ससुर को सजा सुनाई। न्यायिक कार्यवाही सुचारु होने का संदेश चार माह से बंद चल रही अदालतों में 31 जुलाई से फिर जीआईसी में वर्चुअल कोर्ट शुरू हुई। तीन दिन की छुट्टी के बाद मंगलवार को दूसरे दिन वर्चुअल कोर्ट लगी और जिला जज ने सजा सुनाकर न्यायिक कार्यवाही के धीरे-धीरे सुचारु होने का संदेश भी दे दिया।


 


मामले में ससुर पुत्तीलाल जमानत पर था जबकि अजीत जेल में ही बंद है। सजा सुनाए जाने के दौरान जिला जज ने पुत्तीलाल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जबकि अजीत को जेलर के व्हाट्सएप से वीडियो कॉल के जरिए देखा। इसके बाद दोनों को सजा सुनाई। शायद शहर की अदालत में यह पहला मौका था जब जेल में बंद किसी आरोपी को वीडियो कॉल के माध्यम से उम्रकैद की सजा सुनाई गई हो।

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